बिहार चुनाव 2025: NDA में सीट-बंटवारे का फार्मूला तय, नीतीश कुमार बने "बड़े भाई"।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। एनडीए गठबंधन के भीतर सीट-बंटवारे को लेकर जो असमंजस पिछले कुछ हफ्तों से चल रहा था, अब लगभग साफ़ होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में जदयू को गठबंधन में "बड़े भाई" की भूमिका दी जा रही है।
सीट-बंटवारे का प्रस्तावित फार्मूला
गठबंधन के स्तर पर जिस फार्मूले पर सहमति बनने की चर्चा है, उसके मुताबिक सीटों का वितरण इस प्रकार है:
- जदयू (JD(U)): लगभग 102 सीटें
- भाजपा (BJP): लगभग 101 सीटें
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास गुट): लगभग 20 सीटें
- हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा): लगभग 10 सीटें
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM): लगभग 10 सीटें
कुल मिलाकर यह फार्मूला विधानसभा की 243 सीटों में गठबंधन के सभी सहयोगियों को हिस्सेदारी देता है।
जदयू-भाजपा की बराबरी और प्रतीकात्मक बढ़त
जदयू और भाजपा को लगभग बराबर सीटें मिली हैं, लेकिन जदयू को एक सीट ज्यादा देकर यह संदेश दिया गया है कि मुख्यमंत्री चेहरा नीतीश कुमार ही रहेंगे और गठबंधन में उनकी भूमिका "लीडर" की रहेगी। यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन और जनता के सामने गठबंधन की छवि का भी सवाल है।
सहयोगी दलों की स्थिति
छोटे दलों को भी संतुष्ट करने की कोशिश की गई है।
- लोक जनशक्ति पार्टी को 20 सीटों का हिस्सा दिया गया है।
- हम (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 10-10 सीटें दी जा रही हैं।
यह हिस्सेदारी छोटी ज़रूर है, पर इन दलों के लिए सम्मानजनक मानी जा रही है, क्योंकि इससे उनकी राजनीतिक उपस्थिति बनी रहेगी।
रणनीतिक समीकरण
इस फार्मूले से तीन बड़े संदेश निकलते हैं:
- गठबंधन की एकजुटता – नीतीश कुमार और भाजपा दोनों ने संकेत दिया है कि इस बार NDA टूटा नहीं रहेगा।
- संतुलन में साधने की कोशिश – छोटे दलों को न्यूनतम संतुष्ट कर सीटों की जुगाड़ की गई है।
- राजनीतिक प्रतीकवाद – नीतीश कुमार को भाजपा से "एक सीट ज्यादा" दिलवाकर यह दिखाया गया है कि नेतृत्व का चेहरा वही रहेंगे।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
हालांकि सीटों का यह वितरण प्रस्तावित है, लेकिन किस विधानसभा क्षेत्र से कौन चुनाव लड़ेगा, यह असली पेच है। कई सीटों पर जदयू और भाजपा दोनों की दावेदारी है, और वहाँ आपसी सहमति बनाना आसान नहीं होगा। इसके अलावा छोटे दल अपने हिस्से को और बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
निष्कर्ष
बिहार NDA में सीट-बंटवारे का जो फार्मूला सामने आया है, उससे साफ है कि नीतीश कुमार इस चुनाव में भी गठबंधन का केंद्रीय चेहरा रहेंगे। भाजपा ने भी संतुलन साधने के लिए बराबरी का फार्मूला स्वीकार किया है, जबकि छोटे दलों को उनके राजनीतिक वजन के हिसाब से हिस्सेदारी दी गई है। अब सबकी नज़र इस बात पर टिकी है कि अंतिम सूची कब जारी होती है और कौन-कौन से नेता किस विधानसभा सीट से मैदान में उतरते हैं।
धन्यवाद।

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