चुनाव आयोग और तेजस्वी यादव विवाद: EPIC कार्ड की दोहरी एंट्री पर मचा सियासी तूफान, जानिए पूरा मामला विस्तार से।
चुनाव आयोग और तेजस्वी यादव विवाद: EPIC कार्ड की दोहरी एंट्री पर मचा सियासी तूफान, जानिए पूरा मामला विस्तार से।
पटना, अगस्त 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति उस समय गरमा गई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नाम पर दो अलग-अलग EPIC (Electors Photo Identity Card) नंबर सामने आए। यह मामला उस समय तूल पकड़ गया जब तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जबकि चुनाव आयोग (ECI) ने स्पष्ट किया कि उनका नाम एक अन्य EPIC नंबर के साथ पहले से सूची में मौजूद है।
यह विवाद सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक प्रणाली, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
EPIC कार्ड विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के तहत उनका नाम मतदाता सूची से गायब हो गया है। उन्होंने इस दौरान एक EPIC नंबर प्रस्तुत किया जो था RAB2916120। उन्होंने इसे प्रमाण के तौर पर पेश करते हुए यह भी दावा किया कि हजारों लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं।
चुनाव आयोग ने उनके दावे की जांच की और पाया कि तेजस्वी यादव का नाम EPIC नंबर RAB0456228 के तहत पहले से ही सूचीबद्ध है। वह पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 34 में सीरियल नंबर 416 पर दर्ज हैं।
चुनाव आयोग की सख्त प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तेजस्वी यादव को नोटिस जारी किया और उनसे उस EPIC कार्ड की मूल प्रति मांगी जो उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था, यानी RAB2916120। आयोग ने कहा कि यह EPIC नंबर उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं पाया गया है और उसकी वैधता संदिग्ध है।
यदि जांच में यह पाया गया कि किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक EPIC कार्ड हैं या फर्जी पहचान पत्र के आधार पर नाम दर्ज किया गया है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के अंतर्गत जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
क्या दो EPIC नंबर होना अपराध है?
भारतीय निर्वाचन प्रणाली में प्रत्येक मतदाता को एक अद्वितीय EPIC नंबर जारी किया जाता है। एक नागरिक का नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में नहीं हो सकता और न ही उसके पास दो EPIC कार्ड हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है, तो उसे गंभीर अपराध माना जाता है।
तेजस्वी यादव के मामले में भी यदि यह साबित हो जाता है कि दोनों EPIC नंबरों में से एक फर्जी है या जानबूझकर बनाया गया है, तो चुनाव आयोग को उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
NDA की प्रतिक्रिया: FIR की मांग
इस मामले को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) खासा आक्रोशित है। BJP और JDU जैसे घटक दलों ने आरोप लगाया है कि तेजस्वी यादव ने फर्जी पहचान के सहारे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया है, जो कि एक गंभीर चुनावी अपराध है। उन्होंने आयोग से मांग की है कि तेजस्वी यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
RJD और INDIA गठबंधन का रुख
दूसरी ओर, RJD ने इस पूरे विवाद को एक राजनीतिक साजिश बताया है। RJD प्रवक्ताओं का कहना है कि यह कदम तेजस्वी यादव की छवि धूमिल करने के लिए उठाया गया है और इसका कोई वैधानिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना है और विपक्ष को दबाना है।
तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह संस्था अब निष्पक्ष नहीं रही और सत्तारूढ़ दलों के इशारे पर काम।
धन्यवाद।

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