बिहार डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को दो वोटर आईडी रखने के आरोप में चुनाव आयोग का नोटिस, तेजस्वी यादव का बड़ा हमला।
बिहार डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को दो वोटर आईडी रखने के आरोप में चुनाव आयोग का नोटिस, तेजस्वी यादव का बड़ा हमला।
पटना, अगस्त 2025 — बिहार की राजनीति इस समय एक बड़े विवाद में उलझी हुई है। राज्य के डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता विजय कुमार सिन्हा पर दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए वोटर आईडी रखने का आरोप लगा है। चुनाव आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है और जवाब तलब किया है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे सीधा चुनावी अनियमितता बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह विवाद विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी को और तेज कर रहा है।
मामला कैसे शुरू हुआ
तेजस्वी यादव ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि विजय सिन्हा के नाम लखीसराय और बांकीपुर—दोनों विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज हैं।
तेजस्वी का दावा है कि दोनों जगह अलग-अलग EPIC नंबर दर्ज हैं और उम्र में भी अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों के साथ चुनाव आयोग सख्ती करता है, तो सत्ताधारी नेता पर वही नियम क्यों न लागू हों।
तेजस्वी ने अपने बयान में कहा,
"या तो चुनाव आयोग दोषी है या फिर डिप्टी सीएम। दो वोटर आईडी रखना कानूनन अपराध है, और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की कार्रवाई
- बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र के ERO ने विजय सिन्हा को नोटिस भेजा है, जिसमें उन्हें 14 अगस्त शाम 5 बजे तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
- नोटिस में पूछा गया है कि आखिर कैसे उनका नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज है।
- पटना जिलाधिकारी ने भी अलग से पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।
- चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो Representation of the People Act, 1950 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जुर्माना, कारावास और मताधिकार रद्द करने तक की सजा का प्रावधान है।
विजय सिन्हा की सफाई
विजय सिन्हा ने सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि वे केवल लखीसराय से वोट डालते हैं और पिछले साल ही बांकीपुर से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया था।
सिन्हा के अनुसार,
"मैंने BLO को आवेदन देकर बांकीपुर से नाम हटाने की मांग की थी। मेरे पास इसके लिखित प्रमाण हैं। विपक्ष सस्ती राजनीति कर रहा है।"
कानूनी पहलू
- दो वोटर आईडी रखना अवैध है और यह चुनावी अपराध की श्रेणी में आता है।
- कानून के मुताबिक, एक व्यक्ति केवल उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता हो सकता है जहां वह सामान्यतः निवास करता है।
- यदि जानबूझकर एक से अधिक जगह नाम दर्ज करवाया गया है, तो यह गंभीर अपराध माना जाता है।
राजनीतिक असर
यह मामला बिहार में पहले से चल रहे Special Intensive Revision (SIR) विवाद को और हवा दे रहा है, जिसमें विपक्ष पहले ही मतदाता सूची में गड़बड़ियों का आरोप लगा चुका है।
- विपक्ष के लिए यह मामला सत्ता पक्ष को घेरने का मजबूत हथियार बन सकता है।
- बीजेपी के लिए यह एक इमेज मैनेजमेंट की चुनौती है, खासकर चुनाव से ठीक पहले।
आगे क्या होगा?
अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। विजय सिन्हा को तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।
यदि दस्तावेज और सबूत से साबित हो जाता है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तो मामला प्रशासनिक त्रुटि मानकर सुलझ सकता है।
लेकिन अगर यह साबित होता है कि जानबूझकर दोहरे पंजीकरण बनाए रखे गए, तो कानूनी कार्रवाई अनिवार्य होगी।
निष्कर्ष
बिहार का यह विवाद दिखाता है कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता लोकतंत्र के लिए कितनी जरूरी है।
डिप्टी सीएम जैसे ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ लगे ऐसे आरोप चुनावी विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती हैं।
अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करते हैं, और क्या यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव के परिणामों को प्रभावित करेगा।
धन्यवाद।

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