न्यायमूर्ति बी आर गवई ने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, भारत के पहले बौद्ध और दूसरे दलित CJI होंगे।
न्यायमूर्ति बी आर गवई ने भारत के 52 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। भारत के पहले बौद्ध और दूसरे दलित CJI होंगे।
दलितों के लिए सामानता और सम्मान को अंबेडकर के दर्शन को अपनी दृढ़ता के अनुरूप और भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने से एक दिन पूर्व ही न्याय मूर्ति भूषण रमाकांत गवई ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायाधीश और न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में हम अपने पद को पूर्ण रूप से सामाजिक और राजनीतिक न्याय के लिए प्रयास करने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं।
न्यायमूर्ति भूषण रमाकांत गवई ने कहा कि हमारा लक्ष्य"समय पर न्याय" ही होना चाहिए। और न्याय न्यायसंगत होना चाहिए। चाहे किसी भी धर्म के व्यक्ति के सामाजिक या आर्थिक स्थिति चाहे कुछ भी हो।
न्यायमूर्ति भूषण रमाकांत गवई ने अपने 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने से एक दिन पूर्व ही बुद्धपूर्णिमा के अवसर पर दिल्ली के शांति स्तूप का दौरा किया और अपने विचार को व्यक्त करते हुए कहा कि बी आर अंबेडकर का भारत की स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतो पर बहुत ही विश्वास था। जो भारत के लोकतंत्र और एकता के लिए हमेशा ही इसकी आवश्यकता होती है।
आगे उन्होंने बताया कि गरीबों की कानूनी सहायता देना उनकी पहली प्राथमिकता रही है। और उन्होंने कहा कि मेरा ऐसा मानना है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय विधिक सहायता समिति अपनी गतिविधियों को भारत के सभी राज्य और जिला स्तरीय विधिक सेवा प्राधिकरण के समन्वयित करें। ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए न्याय की प्रक्रिया सस्ता और सुलभ हो सके।
उनके अनुसार विविधता और समावेशित भी एक मंत्र है। जो पिछले कई वर्षों से लिए गए निर्णय की प्रक्रिया उनके कार्य का हिस्सा है। उन्होंने महिलाओं को न्यायाधीशों और न्यायिक प्रक्रिया में भागीदारी को लाने और उनकी योग्यता और उपयोगिता से समझौता किए बिना संवैधानिक न्यायालयों में विविध समुदायों के रूप में प्रतिनिधित्व देने का वार्षिक प्रयास करेंगे।
आपको बता दे की भारत के 75 वर्षों के इतिहास में सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशके रूप में पहले बौद्ध और दूसरे दलित 52 वें भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति बी आर गवई शपथ लेने वाले सीजेआई केजी बालकृष्णन के बाद भारत के दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश होंगे।
न्यायमूर्ति बी आर गवई की शुरुआती शिक्षा उनके पैतृक शहर अमरावती विदर्भ के नगर पालिका द्वारा संचालित एक स्कूल से आरंभ हुआ था। इसके बाद उन्होंने लॉ की पढ़ाई पूरी करने के लिए मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष की लो की पढ़ाई करने के बाद एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के लिए फिर से अमरावती आ गए। आपको बता दे की उनके पिता एक राजनीतिक पार्टी से संबंध रखते थे जो महाराष्ट्र विधानसभा परिषद के उपाध्यक्ष और एक बार अध्यक्ष भी बने थे।
वे अरे दवाई अपने कानूनी डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने नागपुर में वकालत की प्रैक्टिस शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2002 में उनके नाम की सिफारिश हाई कोर्ट के लिए उनके नाम की सीफारीस की गई लेकिन कुछ कारणों की वजह से उनका नाम वापस ले लिया गया। 14 नवंबर 2003को वे मुंबई हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लिया। और फिर आज वह भारत के एक मात्र पहले बौद्ध और दूसरे दलित के रूप में 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लिया है।
धन्यवाद।

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