जम्मू कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है। और पुरानी दर्द को याद दिलाकर नए जख्म और कर दिए हैं। पूरा देश आज पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना किसी ना किसी रूप में सोशल मीडिया पर व्यक्त कर रहे हैं।
इसी कड़ी को आगे बढ़ते हुए मोदी सरकार ने आपातकालीन बैठक बुलाकर बुधवार की पहलगाम आतंकी हमले को लेकर एक समीक्षा बैठक की और पांच ऐसे निर्णय लिए जो पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए जरूरी है।
मोदी और सीसीएस की प्रमुख बैठक में सबसे पहले भारत में पाकिस्तान के दूतावास को बंद करने और 48 घंट में तत्कालीन राजनयीक कों को भारत छोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। इसके अलावा अटारी-वाघा बॉर्डर को फिलहाल अनिश्चित समयके लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। और पाकिस्तान में जो भारत का दूतावास उस को भी बंद करने और अपने राजनीयको को भारत वापस आने को कह दिया गया है।
आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 लोगों ने अपनी जान गवाही है। और 20 से 25 लोग गंभीररूप से घायल हो कर अस्पताल में भारती हैं।
इस घटना के बाद प्रधानमंत्री ने सीसीएस की बैठक बुलाई जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सीसीएस की बैठक में मौजूद थे। और स्थिति का आकलन करते हुए पाकिस्तान के विरुद्ध कार्यवाही का आश्वासन दिया ।
सीसीएस की बैठक में लिए गए फैसले को विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने प्रेस कांफ्रेंस करके सारी स्थिति को स्पष्ट रूप बताते हुए। बैठक में लिए गए पांच अहम फैसलों को मीडिया के लोगों को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बता दिया।
विक्रम मिस्त्री ने बैठक में लिए गए फैसले में बताया कि सबसे पहले हम भारत और पाकिस्तान के बीच अटारी बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए बंद करते हैं। जिससे तत्काल प्रभाव दोनों देश के बीच लोगों के आवाजाही को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है ।
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में आई खटास और जम्मू कश्मीर के पहलगाम की घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया है। जिसके चलते भारत ने फैसला लेते हुए इंडस वॉटर ट्रीटी (जल संधि) को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जिससे पाकिस्तान को अब बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा।
क्या है सिंधु जल समझौता? जिसे भारत ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद रोक लगाने का फैसला किया है।
आपको बता दे की भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली सिंधु और उनकी सहायक नदियों के जल भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को दोनों देश के बीच एकाकार हुआ था जिसे भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता के नाम से जाना जाता है। मालूम हो यह सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक के मध्यस्थ में हुआ था। जिसके अनुसार सिंधु नदी के जल का उपयोग दोनों देश समान रूप से करेंगे। लेकिन पाकिस्तान ने अनेकों बार भारत के प्रति अपनी कायरता पूर्ण आचरण को प्रकट कर इस तरह की घटना को अंजाम देता आ रहा है। अब भारत को भी चाहिए कि पाकिस्तान को इसी तरह के जवाब देने चाहिए ताकि पाकिस्तान जीवन भर याद रखें।
19 सितंबर 1960 में 9 वर्षों के लगातार प्रयासों के बाद दोनों देश भारत और पाकिस्तान ने इस सिंधु जल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे यह समझौता उसे समय भारत और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में इस समझौते पर अपनी सहमति के बाद हस्ताक्षर किए थे।
सिंधु जल संधि के अनुसार सिंधु, सतलुज, झेलम, चिनाब, रावी और व्यास जैसी नदियां इस समझौते में शामिल थी। भारत इन सभी नदियों के केवल इस प्रतिशत जल और पाकिस्तान 80% जल का उपयोग करेगा। सिंधु नदी को पाकिस्तान का जीवन रेखा के रूप में जाना जाता है।
धन्यवाद।

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