:-भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) अदालत ने पूर्व सेबी प्रमुख रही माधवी पूरी बुच के साथ-साथ सेबी के उच्च अधिकारियों पर FIR दर्ज करने और जांच करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने प्रथम दृश्य में पाया है की सेवी ने नियामक चुक और हेरा फेरी की हैं।
:-ACB कोर्ट मे पत्रकार सपन श्रीवास्तव के तरफ से दायर याचिका पर सनी कर रही थी। जिनके तरफ से आप यह थे कि बीएसई ने सेबी के लिस्टिंग नियमों का अनुपालन कोटक पर रखकर 1994 में कैल्स रिफायनिंग को सूचीबद्ध किया था।
:-शिकायत करते हुए याचिका में कहा गया है कि सेबी बीएससी के तरफ से कैल्स रिफायनिंग के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की। जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
:-सेबी के तरफ से अपने बचाव में कहा कि हम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देंगे।
कोर्ट ने 30 दिन के अंदर मांगी रिपोर्ट
कोर्ट के अनुसार, सेबी की ओर से किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं करने के कारण।crpc की धरा156(3) के अनुसार कोर्ट इसमें दखल देने की जरूरत को गंभीरता से लेता है! और न्यायालय इसे उचित समझता है। कोर्ट ने कहा कि वह जांच की निगरानी खुद से करेगी और 30 दिनों के भीतर इससे संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है।
:-माधवी बुच के अलावा बीएससी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुंदररामन राम मूर्ति, जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल, सेबी के तीन पूर्व कालीन सदस्य अश्वनी भाटिया अनंतनारायणन जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय शामिल है।
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